व्याकरणवीथि:
वर्ण विचार
- भाषा की सबसे छोटी इकाई को वर्ण कहते हैं।
- पाणिनि ने वर्णमाला को 14 सूत्रों में प्रस्तुत किया है।
स्वर
- स्वर के तीन भेद:
- ह्रस्व स्वर: 1 मात्रा का समय (उदाहरण: अ, इ, उ, ऋ, लृ)
- दीर्घ स्वर: 2 मात्राओं का समय (उदाहरण: आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)
- प्लुत स्वर: 3 या अधिक मात्राओं का समय (उदाहरण: ओ३म्)
व्यञ्जन
- जिन वर्णों का उच्चारण स्वर वर्णों की सहायता के बिना नहीं किया जा सकता, उन्हें व्यञ्जन कहते हैं।
- सम्पूर्ण व्यञ्जन निम्न तालिका में दर्शाए गए हैं:
- क वर्ग: क्, ख्, ग्, घ्, ङ्
- च वर्ग: च्, छ्, ज्, झ्, ञ्
- ट वर्ग: ट्, ठू, ड्, ढ्, ण्
- त वर्ग: त्, थ्, द्, ध्, न्
- प वर्ग: प्, फ्, ब्, भ्, म्
उच्चारण स्थान
- उच्चारण स्थान: कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ, नासिका
प्रयत्न
- प्रयत्न के दो भेद:
- आभ्यन्तर प्रयत्न: मुख के अन्दर की क्रिया
- बाह्य प्रयत्न: फेफड़े से कण्ठ तक का यत्न
प्रत्याहार
- प्रत्याहार दो वर्णों से बनता है।
- उदाहरण: अच् = अ, इ, उ, ऋ, लृ, ए, ओ, ऐ, औ
संयुक्त व्यञ्जन
- दो व्यञ्जनों के संयोग से बने वर्ण को संयुक्त व्यञ्जन कहते हैं।
- उदाहरण:
- क्ष = क् + श्
- त्र = त् + र्
- ज्ञ = ज् + ञ्
अनुस्वार और विसर्ग
- अनुस्वार: नासिका मात्र से उच्चारण (उदाहरण: अहम्)
- विसर्ग: स्वर के बाद आता है (उदाहरण: राम:, देव:)
महत्वपूर्ण सूत्र
- पाणिनि के 14 सूत्र:
- अइउण् (अ, इ, उ)
- ऋलृक् (ऋ, लृ)
- एओङ् (ए, ओ)
- ऐऔच् (ऐ, औ)
- हयवरट् (ह्, य्, व्)
- लण् (ल्)
- ञमङणनम् (ञ, म्, ङ्, ण्, न्)
- झभञ् (झ्, भ्)
- घढधष् (घ्, ढ्, ध्)
- जबगडदश् (ज्, ब्, ग्, ड्, द्)
- खफछठथचटतव् (ख्, फ्, छ्, ठ्, थ्, च्, ट्, त्)
- कपय् (क्, प्)
- शषसर् (श्, ष्, स्)
- हल् (ह्)