अव्यय
परिभाषा
- संस्कृत के वे शब्द जो सर्वदा एक जैसे ही रहते हैं (जिनमें विभक्ति, वचन तथा लिङ्ग के आधार पर कोई परिवर्तन नहीं होता है) उन्हें अव्यय कहते हैं।
उदाहरण
- सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु, सर्वासु च विभक्तिषु।
- वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम्।
अव्यय के प्रकार
- अव्यय शब्द: जैसे कि 'यत्', 'यत्र', 'यदि', 'यद्यपि', 'यावत्', 'नूनम्', 'सर्वदा', 'अथ', 'अलम्', 'अत्र', 'सहसा', 'श्वः', 'ह्यः', 'शनैः', 'सम्प्रति', 'अधुना', 'इदानीम्' आदि।
वाक्य प्रयोग
- यावत् परीक्षाकाल: नायाति तावत् परिश्रमं कुरु।
- अहं सम्प्रति गृहं गन्तुम् इच्छामि।
- यत्र-यत्र धूमः तत्र-तत्र अग्निः।
सामान्य गलतियाँ
- अव्ययों का वाक्यों में प्रयोग प्रायश: एक साथ ही करना चाहिए, अन्यथा वाक्य अपूर्ण रहता है।
परीक्षा टिप्स
- अव्यय शब्दों का सही प्रयोग सुनिश्चित करें।
- वाक्य संरचना में अव्यय का स्थान सही होना चाहिए।