समास परिचय
समास का अर्थ
- 'समसनम्' इति समास: का अर्थ है— संक्षेपण।
- दो या दो से अधिक पदों में प्रयुक्त विभक्तियों, समुच्चय बोधक 'च' आदि को हटाकर एक पद बनाना।
समास के भेद
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अव्ययीभाव
- पहला पद अव्यय और प्रधान होता है।
- उदाहरण: यथाशक्ति = शक्तिम् अनतिक्रम्य
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तत्पुरुष
- उत्तर पद की प्रधानता होती है।
- उदाहरण: शरणागत: = शरणं आगत:
- उपभेद:
- कर्मधारय समास
- द्विगु समास
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द्वन्द्व
- दोनों पदों की प्रधानता होती है।
- उदाहरण: लवश्च कुशश्च = लवकुशौ
- उपभेद:
- इतरेतर द्वन्द्व
- समाहार द्वन्द्व
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बहुव्रीहि
- पूर्व तथा उत्तर दोनों पद प्रधान नहीं होते।
- उदाहरण: महान्तौ बाहू यस्य स:
उदाहरण
- कर्मधारय समास: नीलम् उत्पलम् = नीलोत्पलम्
- द्विगु समास: सप्तानां दिनानां समाहारः = सप्तदिनम्
- द्वन्द्व समास: माता च पिता च = मातापितरौ
- बहुव्रीहि समास: चन्द्र इव मुखम् = चन्द्रमुखी
विशेष बातें
- द्वन्द्व में ह्रस्व इकारान्त तथा ह्रस्व उकारान्त पद को पहले रखा जाता है।
- श्रेष्ठ या पूज्य पदों का प्रयोग पहले होता है।
- एकशेष में पुंल्लिङ्ग और स्त्रीलिङ्ग पदों में से पुंल्लिङ्ग पद ही शेष रहता है।
निष्कर्ष
समास का अध्ययन भाषा की संरचना को समझने में सहायक है और यह विभिन्न पदों के संक्षेपण की प्रक्रिया को दर्शाता है।