शिशुलालनम्
सारांश
- कथा का संक्षेप: राम अपने पुत्र लव और कुश को सिंहासन पर बैठाना चाहते हैं, लेकिन वे विनम्रता से मना करते हैं।
- भावना: राम अपने पुत्रों के प्रति स्नेह और आलिंगन की लालसा रखते हैं।
- कथा का संदर्भ: यह नाटक 'कुन्दमाला' से लिया गया है, जिसका लेखक दिङ्नाग है।
- मुख्य पात्र: राम, लव, कुश, विदूषक।
- विशेषण: राम की भावनाएँ और उनके पुत्रों के प्रति स्नेह का वर्णन।
महत्वपूर्ण बिंदु
- बालक लालनीय: गुणी लोगों के लिए भी छोटी उम्र के कारण बालक लालनीय होता है।
- चन्द्रमा का वर्णन: चन्द्रमा बालभाव के कारण शङ्कर के मस्तक का आभूषण बनता है।
- कथा का उद्देश्य: श्रोताओं को पवित्र और आनन्दित करना।
अभ्यास प्रश्न
- कुश और लव का संबंध किससे है?
- राम ने लव और कुश को किस प्रकार से सम्मानित किया?
- वाल्मीकि का क्या योगदान है?
शब्दार्थ
- पितामहः: दादा
- सहस्त्रदीधितिः: सूर्य
- कण्ठाश्लेषस्य: आलिंगन का
- विचिन्त्य: विचार करके
- अलम्: छोड़ दो
- अत्यधिक दक्षता: अत्यधिक कुशलता
उद्धरण
- "भवति शिशुजनो वयोऽनुरोधाद् गुणमहताम् अपि लालनीय एव।" - यह श्लोक शिशु स्नेह का वर्णन करता है।