अव्ययपदानि
अभ्यास
- अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा अव्ययपदानि चित्वा लिखत-
- (i) एकदा तस्य भार्या पितुर्गृहं प्रति चलिता।
- (ii) भवान् कुत: भयात् पलायितः।
- (iii) तत्र गम्यताम्।
- (iv) त्वं सत्वरं चल।
- (v) तेन सदृशं न अस्ति।
- (vi) गीता सुगीता च वदतः।
- (vii) यदा सः पठति तदा एव शोभते।
- (viii) तापसौ लवकुशौ तत: प्रविशतः।
- (ix) अलम् अतिदाक्षिण्येन।
- (x) अहम् अपि श्रावयामि।
उचिताव्ययपदैः रिक्तस्थानानि पूरयत
- सर्वत्र, एव, इति, ननु, एवम्, तत्र, उच्चैः, तथापि, बहुधा, मा
- (i) मम गुरु:
- (ii) क:
- (iii) कुपिता सा वदति।
- (iv) त्वं गच्छ।
- (v) यूयं चापलं कुरुत।
- (vi) कृषीवलः बहुवारं प्रयत्नमकरोत्।
- (vii) कृषक: बलीवर्दं।
- (viii) बहूनि अपत्यानि मे सन्ति।
- (ix) वृष: नोत्थितः।
- (x) जलोपप्लव: सञ्जातः।
अव्ययपदानि
- कालवाचकानि
- स्थानवाचकानि
- युग्मानि
- समानार्थकानि
उदाहरण
- पुरा- प्राचीनकाल में
- यत्र- जहाँ
- यावत्-तावत् = ननु
- विकीर्णानि
- अपि-भी
- सद्य:- तुरन्त
- तत्र- वहाँ
- जब तब
- नूनम्
- निश्चय
- वृथा- बेकार
- सपदि - तुरन्त
- अचिरात्- अचिरेण- अभी
- उपरि- ऊपर
- यत्र-तत्र= जहाँ
- अभी
- खलु
- अथ किम्- हाँ
- कुत्र- कहाँ
- वहाँ
- सततम्- निरन्तर
- अत्र- यहाँ
- शनैः-शनै:- धीरे - सम्प्रति
- और क्या
- च- और
- अभितः- दोनो ओर
- सर्वत्र- सब जगह
- धीरे
- अपरम्- और भी
- अधुना
- अब
- नीचै:- नीचे
- यदा जब
- इदानीम्
- तदा = तब
- साम्प्रतम्.
- कदा = कब
- सदा
- परित:- चारो ओर
- उभयतः- दोनो ओर
- सर्वत:- सब ओर
- कदाचित्- कभी,
- किसी समय
- अचिरम्- अभी
- एकदा- एक बार
- सकृत्- एक बार
- सहसा- अचानक
- सदा- हमेशा
- इतस्तत:- इधर-उधर
- कुत:- कहाँ से
- नक्तम्- रात
- दिवा- दिन
- यदि तर्हि = यदि सर्वदा तो
- मुहुर्मुहु:= बार-बार
- यथा-तथा= जैसा वैसा
- यथापि तथापि= जैसे भी वैसे भी
- इत्थम्- इस प्रकार से
- एवम्- इस प्रकार
- सत्वरम्- शीघ्र
- अन्यथा- दूसरे प्रकार से
- सर्वथा - सब प्रकार से
- एव- ही
- प्रति-ओर
- अलम्- बस, समर्थ
- न- नहीं
- मा- मत
- अत:- इसलिए
- इति- इस प्रकार
- अद्य- आज
- ह्यः- बीता हुआ कल
- श्व:- आने वाला कल
- वृथा- व्यर्थ
- समीपे- पास में
- दूरे दूर
- उच्चैः- ज़ोर से
- पुन:- फिर
- तूष्णीम् - चुपचाप
- तु- तो
- परम्- परन्तु
- कथम् - कैसे
- अनृतम्- झूठ
- तत:- तत्पश्चात्
- परस्परम्-आपस में
- इव- के समान