सपनों के-से दिन
स्कूल का माहौल
- स्कूल में केवल छोटे-छोटे नौ कमरे थे।
- हेडमास्टर शर्मा जी का कमरा पहले था, जहाँ हमेशा चिक लटकी रहती।
- प्रेयर के समय हेडमास्टर बाहर आते और लड़कों की कतार देखते।
- मास्टर प्रीतमचंद (पीटी) लड़कों से सख्ती से पेश आते थे।
पीटी साहब की सख्ती
- पीटी साहब की एक 'शाबाश' छात्रों को फ़ौज के तमगों के समान लगती थी।
- उनका डर छात्रों में गहरी छाप छोड़ता था।
- छात्रों को अनुशासन में रखने के लिए कठोरता से पेश आते थे।
छुट्टियों का डर
- छुट्टियों के बाद स्कूल जाने का डर बढ़ जाता था।
- छुट्टियों में खेल-कूद का आनंद और स्कूल में पढ़ाई का भय।
- छुट्टियों का काम न करने पर पिटाई का डर।
बचपन की यादें
- बचपन में खेलना और चोट लगना सामान्य था।
- स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद का महत्व।
- ननिहाल में बिताए गए दिन और वहाँ की यादें।
हेडमास्टर शर्मा जी का दृष्टिकोण
- शर्मा जी ने पीटी साहब की बर्बरता को सहन नहीं किया।
- उन्होंने पीटी साहब को मुअत्तल कर दिया।
निष्कर्ष
- स्कूल का अनुभव मिश्रित था: डर, अनुशासन, और बचपन की खुशियाँ।
- पीटी साहब की सख्ती और हेडमास्टर का दृष्टिकोण छात्रों पर गहरा प्रभाव डालते थे।