संगतकार की भूमिका
परिचय
संगतकार मुख्य गायक का साथ देने वाला एक महत्वपूर्ण कलाकार है। उसकी भूमिका संगीत में न केवल सहयोगी होती है, बल्कि वह मुख्य गायक की आवाज़ को भी संजीवनी प्रदान करता है।
संगतकार की विशेषताएँ
- सहयोगी: मुख्य गायक के साथ गायन करने वाला या कोई वाद्य बजाने वाला कलाकार।
- मानवता: उसकी आवाज़ में हिचक और स्वर को ऊँचा न उठाने की कोशिश को विफलता नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।
संगतकार की भूमिका के उदाहरण
- संगीत समारोह: जब मुख्य गायक तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर लड़खड़ाता है, तब संगतकार उसे बिखरने से बचाता है।
- सामाजिक योगदान: किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं।
प्रश्न अभ्यास
- संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?
- संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?
- संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?
- सफलताओं के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है, तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं?
संगीत के सप्तक
- सप्तक: संगीत के लिए सात स्वर तय किए गए हैं।
- स्वर: षडज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम्, धैवत, निषाद।
- संक्षिप्त नाम: सा, रे, ग, म, प, ध, नि।
- प्रकार:
- मध्य सप्तक: साधारण ध्वनि।
- तार सप्तक: मध्य सप्तक से ऊपर।
- मंद्र सप्तक: मध्य सप्तक से नीचे।
निष्कर्ष
संगतकार की भूमिका संगीत में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह न केवल मुख्य गायक का सहयोगी होता है, बल्कि उसकी आवाज़ को भी संजीवनी प्रदान करता है।