पानी रे पानी
मुख्य बिंदु
- जल-चक्र: समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना।
- वर्षा जल संग्रहण: वर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से धरती में संग्रह करना।
- जल संकट: जल की अत्यधिक कमी होना।
महत्वपूर्ण अवधारणाएँ
- भूजल: जमीन के नीचे छिपा जल भंडार।
- जल संकट के कारण: तालाबों में कचरा फेंककर भरना।
चर्चा के प्रश्न
- धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
- जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
- यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
- पानी को रुपयों से कई गुना क्यों बताया गया है?
जल के प्राकृतिक स्रोत
- वर्षा
- नदी
- झील
- तालाब
जल संकट के प्रभाव
- गर्मी के दिनों में नल सूख जाते हैं।
- बरसात के दिनों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
जल संग्रहण की विधियाँ
- छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण: भवनों की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाना।
लेखक का परिचय
- अनुपम मिश्र: पर्यावरणविद, लेखक और संपादक।
- प्रमुख पुस्तक: "आज भी खरे हैं तालाब"।
निष्कर्ष
- जल-चक्र का सही उपयोग न करने पर पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
- जल के स्रोतों की रक्षा करना आवश्यक है।