महादेव भाई की जीवनी
महादेव भाई की विशेषताएँ
- महादेव भाई का परिचय: 'पीर - बावर्ची - भिश्ती - खर' के रूप में गौरव अनुभव करते थे।
- गांधीजी के लिए पुत्र से भी अधिक महत्वपूर्ण थे।
- 1917 में गांधीजी के पास पहुँचे और उत्तराधिकारी का पद सौंपा गया।
महादेव भाई की लेखन शैली
- महादेव भाई के लिखे पत्र वाइसराय के पास जाते थे।
- उनकी लिखावट सुंदर और मंत्रमुग्ध करने वाली थी।
- गांधीजी के व्याख्यान और टिप्पणियाँ महादेव की डायरी में सटीकता से दर्ज होती थीं।
स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
- पंजाब में फ़ौजी शासन के दौरान कहर बरसाया गया।
- महादेव भाई ने गांधीजी के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महादेव भाई की मृत्यु
- उनकी अकाल मृत्यु का कारण कार्यों का अत्यधिक बोझ माना गया।
- गांधीजी ने कहा कि यह घाव कभी नहीं भरेगा।
महत्वपूर्ण घटनाएँ
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय गांधीजी को गिरफ़्तार किया गया।
- महादेव भाई को गांधीजी ने अपना वारिस कहा।
शब्दार्थ
- आभा: चमक, तेज़
- हम्माल: बोझ उठानेवाला, कुली
- पीर: महात्मा, सिद्ध
- भिश्ती: पानी ढोनेवाला व्यक्ति
- कालापानी: आजीवन कैद की सजा पाए कैदियों को रखने का स्थान
महादेव भाई का कार्य
- महादेव भाई ने गांधीजी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' का अंग्रेजी में अनुवाद किया।
- उन्होंने 'यंग इंडिया' और 'नवजीवन' के लिए लेख लिखे।
गांधीजी का महादेव भाई के प्रति सम्मान
- गांधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा।
- महादेव भाई की प्रतिभा और निष्ठा की प्रशंसा की।