हरिशंकर परसाई और प्रेमचंद के फटे जूते
लेखक का परिचय
- हरिशंकर परसाई: जन्म 1922, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले में।
- शिक्षा: नागपुर विश्वविद्यालय से एम.ए.
- लेखन करियर: 1947 से स्वतंत्र लेखन, वसुधा पत्रिका का प्रकाशन।
- महत्वपूर्ण कृतियाँ:
- हँसते हैं रोते हैं (कहानी संग्रह)
- तट की खोज (उपन्यास)
- विकलांग श्रद्धा का दौर (व्यंग्य संग्रह)
प्रेमचंद का चित्रण
- प्रेमचंद की सादगी और सामाजिक दृष्टि का विवेचन।
- दिखावे की प्रवृत्ति और अवसरवादिता पर व्यंग्य।
व्यंग्य के प्रमुख बिंदु
- जूते का महत्व:
- बाएँ जूते में बड़ा छेद, अँगुली बाहर।
- जूता हमेशा टोपी से कीमती।
- फोटो खिंचाने की विडंबना:
- जूते की कमी के बावजूद फोटो खिंचवाना।
- सामाजिक स्थिति का प्रतीक।
लेखक की दृष्टि
- प्रेमचंद का जूता फटा हुआ, पर चेहरे पर विश्वास।
- अधूरी मुसकान में उपहास और व्यंग्य।
निष्कर्ष
- परसाई का व्यंग्य लेखन सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक पाखंड पर केंद्रित।
- परिवर्तन की चेतना और आदर्श के पक्ष में उपस्थिति।