एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा
संक्षिप्त सारांश
- बचेंद्री पाल ने एवरेस्ट पर चढ़ाई की रोमांचक यात्रा का विवरण दिया है।
- अभियान दल 7 मार्च को दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना हुआ।
- बचेंद्री ने एवरेस्ट को 'सागरमाथा' नाम से जाना।
- अभियान में कई चुनौतियाँ और खतरनाक स्थितियाँ आईं।
- 23 मई 1984 को बचेंद्री ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर भारत की पहली महिला पर्वतारोही बनने का गौरव प्राप्त किया।
महत्वपूर्ण बिंदु
- अग्रिम दल का नेतृत्व: उपनेता प्रेमचंद ने किया।
- सागरमाथा नाम: लेखिका को यह नाम अच्छा लगा।
- ध्वज जैसा दृश्य: बर्फ का बड़ा फूल पर्वत-शिखर पर लहराता हुआ।
- हिमस्खलन: एक शेरपा कुली की मृत्यु हुई और चार घायल हुए।
- कर्नल खुल्लर की टिप्पणी: खतरों को सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए।
- रसोई सहायक की मृत्यु: जलवायु अनुकूल न होने के कारण हुई।
- कैंप-चार: 29 अप्रैल को 7900 मीटर पर लगाया गया।
- लेखिका का परिचय: तेनजिंग ने कहा कि वह एक पक्की पर्वतीय लड़की हैं।
- चढ़ाई की तैयारी: लेखिका ने खाना, कुकिंग गैस और ऑक्सीजन सिलिंडर इकट्ठा किए।
महत्वपूर्ण घटनाएँ
- हिमपात: बर्फ़ के गिरने से स्थिति में परिवर्तन।
- साउथ कोल कैंप: सुरक्षा और आराम की जगह।
- चढ़ाई का अनुभव: लेखिका ने बिना ऑक्सीजन के चढ़ाई की।
- शिखर पर पूजा: दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा बर्फ में दबाया।
उद्धरण
- "यह इतनी ऊँचाई पर सुरक्षा - कार्य का एक ज़बरदस्त साहसिक कार्य था।" - कर्नल खुल्लर
- "मैं भी औरों की तरह एक पर्वतारोही हूँ।" - लेखिका
निष्कर्ष
- बचेंद्री पाल की यात्रा ने न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि को दर्शाया, बल्कि महिलाओं की शक्ति और साहस को भी उजागर किया।