बच्चों का काम पर जाना
विषय का परिचय
- बच्चों का काम पर जाना एक गंभीर सामाजिक समस्या है।
- कवि राजेश जोशी ने इस विषय पर अपनी कविता में गहरी पीड़ा व्यक्त की है।
मुख्य बिंदु
- बच्चों का काम पर जाना एक भयानक स्थिति है।
- यह सवाल उठाता है: "काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?"
- बच्चों को खेल, शिक्षा और जीवन की उमंग से वंचित किया जा रहा है।
कवि का दृष्टिकोण
- कवि ने बच्चों के काम पर जाने को एक सामाजिक-आर्थिक विडंबना के रूप में देखा है।
- उन्होंने यह भी बताया है कि यह स्थिति किसी बड़े हादसे के समान है।
संविधान का प्रावधान
- संविधान के अनुच्छेद 24 में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के काम पर लगाने पर प्रतिबंध का उल्लेख है।
कवि का परिचय
- राजेश जोशी का जन्म 1946 में मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ ज़िले में हुआ।
- उन्होंने पत्रकारिता और अध्यापन किया।
- उनकी प्रमुख काव्य-संग्रह में "एक दिन बोलेंगे पेड़" और "मिट्टी का चेहरा" शामिल हैं।
निष्कर्ष
- बच्चों का काम पर जाना समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, जिसे समझने और समाधान करने की आवश्यकता है।