स्वर्णकाकः
कथा का सारांश
- यह कथा वर्म देश (म्याँमार) की एक श्रेष्ठ लोककथा है।
- कथा में लोभ और उसके दुष्परिणाम, साथ ही त्याग और उसके सुपरिणाम का वर्णन है।
- मुख्य पात्र: सुनहले पंखों वाला कौआ (स्वर्णकाक) और एक निर्धन वृद्धा की पुत्री।
लेखक परिचय
- लेखक: श्री पद्म शास्त्री
- उपाधियाँ: साहित्यायुर्वेदाचार्य, काव्यतीर्थ, साहित्यरत्न, शिक्षाशास्त्री, रसियन डिप्लोमा।
- पुरस्कार: सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार समिति और राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा स्वर्णपदक।
- प्रमुख रचनाएँ:
- सिनेमाशतकम्
- स्वराज्यम् खण्डकाव्यम्
- लेनिनामृतम् महाकाव्यम्
- मदीया सोवियतयात्रा
- पद्यपञ्चतन्त्रम्
- बङ्गलादेशविजयः
- लोकतन्त्रविजयः
- विश्वकथाशतकम्
- चायशतकम्
- महावीरचरितामृतम्
मुख्य घटनाएँ
- एक निर्धन वृद्धा और उसकी विनम्र पुत्री की कहानी।
- माता ने पुत्री को सूर्योदय से पहले तण्डुलान् रखने के लिए कहा।
- स्वर्णकाक ने तण्डुलान् खाने से मना किया और कहा कि वह उसे तण्डुलमूल्य देगा।
- बालिका ने स्वर्णकाक की बातों पर विश्वास किया और स्वर्णमय प्रासाद की ओर बढ़ी।
- दूसरी लुब्धा वृद्धा ने भी स्वर्णकाक से तण्डुलमूल्य मांगा, लेकिन उसे लोभ का फल मिला।
नैतिक
- लोभ का परिणाम बुरा होता है, जबकि त्याग का फल अच्छा होता है।