लौहतुला
सारांश
- जीर्णधन नामक व्यापारी विदेश से लौटकर सेठ से अपनी धरोहर (तराजू) की मांग करता है।
- सेठ बताता है कि उसकी तराजू चूहों द्वारा खा ली गई है।
- जीर्णधन सेठ के पुत्र को स्नान के बहाने नदी तट पर ले जाकर गुफा में छिपा देता है।
- सेठ अपने पुत्र के बारे में पूछता है, जीर्णधन बताता है कि उसे बाज ने उठा लिया है।
- दोनों न्यायालय पहुँचते हैं जहाँ धर्माधिकारी उन्हें न्याय प्रदान करते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु
- कथा का उद्देश्य नीति के गूढ़ तत्त्वों का प्रतिपादन करना है।
- पञ्चतन्त्र के पाँच तन्त्र: मित्रभेदः, मित्रसंप्राप्तिः, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाशः, अपरीक्षितकारकम्।
- जीर्णधन की स्थिति: विभवक्षय के कारण देशान्तर जाने की सोच।
- सेठ का पुत्र स्नान के बहाने जीर्णधन के साथ जाता है।
- न्यायालय में दोनों पक्षों की बातें सुनकर धर्माधिकारी ने न्याय किया।
शिक्षा
- मित्रता और शत्रुता का व्यवहार।
- आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।