- Identify the qualities of a true human being.
- Understand the concept of selflessness and its importance in human life.
- Analyze the significance of great personalities like Dadhichi and Karna in promoting humanity.
- Discuss the idea of living a life free from pride.
- Explore the message of unity and collective progress in the poem 'Manushyata'.
- Reflect on the importance of empathy and compassion in human relationships.
Maithilisharan Gupt – Man..
Learning Objectives
TopChapter Core concepts:
Revision Notes & Summary
Topमनुष्यता
परियोजना कार्य
- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता 'कर्मवीर' तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।
- भवानी प्रसाद मिश्र की 'प्राणी वही प्राणी है' कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।
शब्दार्थ और टिप्पणियाँ
- मर्त्य: मरणशील
- पशु-प्रवृत्ति: पशु जैसा स्वभाव
- उदार: दानशील / सहृदय
- कृतार्थ: आभारी / धन्य
- कीर्ति: यश
- कूजती: मधुर ध्वनि करती
- क्षुधार्त: भूख से व्याकुल
- रंतिदेव: एक परम दानी राजा
- करस्थ: हाथ में पकड़ा हुआ / लिया हुआ
- दधीचि: एक प्रसिद्ध ऋषि जिनकी हड्डियों से इंद्र का वज्र बना था
- परार्थ: जो दूसरों के लिए हो
- अस्थिजाल: हड्डियों का समूह
- उशीनर: गंधार देश का राजा
- क्षितीश: राजा
- स्वमांस: अपने शरीर का मांस
- कर्ण: दान देने के लिए प्रसिद्ध कुंती पुत्र
- महाविभूति: बड़ी भारी पूँजी
- वशीकृता: वश में की हुई
- विरुद्धवाद: बुद्ध का
- दया-प्रवाह: करुणा का प्रवाह
- मदांध: जो गर्व से अंधा हो
- वित्त: धन-संपत्ति
- परस्परावलंब: एक-दूसरे का सहारा
- अमर्त्य - अंक: परमात्मा / स्वयं उत्पन्न होने वाला
- अपंक: कलंक-रहित
प्रश्न- अभ्यास
- व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
- कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?
- उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
- 'मनुष्य मात्र बंधु है' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
- कवि ने दधीचि, कर्ण आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर 'मनुष्यता' के लिए क्या संदेश दिया है?
- कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
- कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
- 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
भाव स्पष्ट कीजिए
- सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही; वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही। विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा, विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?
- रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में, सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
- अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं, दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।
- चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए, विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए। घटेन हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी, अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
योग्यता विस्तार
- अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
- ‘परोपकार' विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।